क्या आप जानते हैं देश में एक प्रधानमंत्री ऐसे भी हुए हैं जिनको INDIA और PAKISTAN के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। उनकी राजनैतिक लोकप्रियता और लोकतंत्र में उनकी सहभागिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्‍हें पाकिस्‍तान ने भी अपना सर्वोच्‍च सम्‍मान निशान ए पाकिस्‍तान उन्‍हें नवाजा था,

वह भारत के एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जिन्‍हें दोनों देशों से ऐसा सम्‍मान मिला है।  उनके बाद अब तक ये पुरस्कार किसी दूसरे प्रधानमंत्री को नहीं दिया गया है। उनका नाम था मोरारजी देसाई।

मोरारजी देसाई को जहां उनके अपने देश भारत की तरफ से अपना सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान भारत रत्‍न नवाजा गया वहीं पाकिस्‍तान ने भी अपना सर्वोच्‍च सम्‍मान निशान ए पाकिस्‍तान उन्हें दिया।

साथ ही मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने की एक और खास बात थी कि वो देश के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी थे। वो भारत के छठे प्रधानमंत्री थे। उनका कार्यकाल 1977 से 1979 तक रहा। यूं तो कांग्रेस में रहते हुए भी उनका नाम इस पद के उम्‍मीद्वार के तौर पर सामने आता था, लेकिन वह इस दौड़ में हमेशा पिछड़ते ही रहे। प्रधानमंत्री का पद उन्हें कांग्रेस से अलग होने के बाद 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार गिरने पर ही मिल पाया था।

मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के भदेली नामक स्थान पर एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वहीं 10 अप्रैल 1995 को 99 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। उनके पिता रणछोड़जी देसाई भावनगर (सौराष्ट्र) में एक स्कूल अध्यापक थे। लेकिन डिप्रेशन (अवसाद) में आकर उन्‍होंने आत्‍महत्‍या कर ली थी। पिता की मृत्यु के तीसरे दिन मोरारजी देसाई की शादी हुई थी। देसाई ने उस समय के बंबई से अपनी पढ़ाई की। कॉलेज में पढ़ते समय उन्‍होंने महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक और अन्य कांग्रेसी नेताओं के भाषणों को सुना था।

1931 में वह गुजरात की कांग्रेस कमेटी के सचिव बन गए। सरदार पटेल के निर्देश पर उन्होंने अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की शाखा स्थापित की और उसके अध्यक्ष भी बने। मोरारजी देशाई 1937 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रहे। इसके बाद वह बंबई कांग्रेस मंत्रिमंडल में शामिल हुए। इस आंदोलन के चलते वह कई वर्षों तक जेल में रहे। उस दौर में वह बड़ा नाम हुआ करते थे। 1952 में वह बंबई के मुख्यमंत्री बने। 1967 में इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर मोरारजी को उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बनाया गया।

बस इसके बाद तो वह कांग्रेस के घोर विरोधियों की सूची में शामिल नाम में से एक नाम बन गए थे। इतना ही नहीं 1975 में आपातकाल के खिलाफ जब जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में आंदोलन का बिगुल फूंका गया तो उसमें मोरारजी देसाई भी शामिल थे। इस आंदोलन की आग ने लगभग पूरे देश को अपने आगोश में जकड़ लिया था।

नतीजा ये हुआ कि 1977 के आम चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। इसके साथ ही मोरारजी देसाई का पीएम बनने का भी सपना पूरा हुआ। उन्‍होंने देश के जिन नौ राज्यों में कांग्रेस का शासन था, वहां की सरकारों को भंग कर दिया और राज्यों में फिर से चुनाव कराये जाने की घोषणा भी कर दी। चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा।

Leave a Reply